आज के समय में निवेश के लिए कई विकल्प उपलब्ध हैं, जिनमें ETF (एक्सचेंज ट्रेडेड फंड) और म्यूचुअल फंड दो प्रमुख साधन हैं। दोनों ही निवेशकों को विविध पोर्टफोलियो और पेशेवर प्रबंधन का लाभ प्रदान करते हैं, लेकिन इनमें कई बुनियादी अंतर होते हैं। आइए इन दोनों निवेश विकल्पों की तुलना करें ताकि आप अपने लिए सही चुनाव कर सकें।
- ETF (Exchange Traded Fund): ये ऐसे फंड होते हैं जो स्टॉक एक्सचेंज पर शेयरों की तरह खरीदे और बेचे जा सकते हैं। ये आमतौर पर किसी इंडेक्स (जैसे Nifty, Sensex) को ट्रैक करते हैं।
- म्यूचुअल फंड: ये निवेशकों से पैसे जुटाकर एक फंड में लगाते हैं, जिसे एक फंड मैनेजर द्वारा स्टॉक्स, बॉन्ड्स या अन्य सिक्योरिटीज में निवेश किया जाता है।
ट्रेडिंग का तरीका
- ETF: स्टॉक की तरह रियल-टाइम में खरीदे और बेचे जाते हैं। दिनभर दाम बदलते रहते हैं।
- म्यूचुअल फंड: दिन के अंत में एक बार NAV (नेट एसेट वैल्यू) पर खरीदे या बेचे जाते हैं।
खर्च और शुल्क
- ETF: आमतौर पर कम एक्सपेंस रेश्यो होता है क्योंकि ये पैसिव रूप से मैनेज होते हैं।
- म्यूचुअल फंड: एक्टिवली मैनेज होने की वजह से इनका एक्सपेंस रेश्यो ETF से अधिक हो सकता है।
तरलता (Liquidity)
- ETF: हाई लिक्विडिटी होती है, क्योंकि इन्हें स्टॉक मार्केट में कभी भी बेचा जा सकता है।
- म्यूचुअल फंड: रिडेम्पशन की प्रक्रिया धीमी हो सकती है और एक दिन लग सकता है।
निवेश के लिए न्यूनतम राशि
- ETF: एक यूनिट के दाम पर खरीदा जा सकता है, जो मार्केट प्राइस पर निर्भर करता है।
- म्यूचुअल फंड: SIP के ज़रिए ₹100 या ₹500 से भी शुरू किया जा सकता है।
टैक्स लाभ
दोनों पर कैपिटल गेन्स टैक्स लागू होता है, लेकिन होल्डिंग पीरियड और टैक्स की दरें थोड़ी भिन्न हो सकती हैं। खासकर अगर आप इक्विटी फंड्स और ETF में तुलना करें।
निष्कर्ष:
अगर आप ट्रेडिंग में सहज हैं और कम खर्च पर इंडेक्स में निवेश करना चाहते हैं, तो ETF आपके लिए बेहतर विकल्प हो सकता है। वहीं, अगर आप नियमित निवेश (SIP) के ज़रिए लंबे समय तक बिना ट्रेडिंग की चिंता किए निवेश करना चाहते हैं, तो म्यूचुअल फंड ज्यादा उपयुक्त रहेगा।
आपकी निवेश शैली और जोखिम सहनशीलता के अनुसार, दोनों में से कोई भी विकल्प चुना जा सकता है।
